राहुल गांधी के मतदाता धोखाधड़ी दावे पर चुनाव आयोग की तथ्य-जांच – जानिए पूरा मामला

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चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के नए मतदाता धोखाधड़ी दावे की जांच की। जानिए क्या है विवाद, क्या बोले राहुल और आयोग का जवाब

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प्रस्तावना

भारतीय राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर नया नहीं है। लेकिन जब मामला सीधे-सीधे चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची की पारदर्शिता से जुड़ा हो, तो इसकी गंभीरता कई गुना बढ़ जाती है। हाल ही में, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए मतदाता धोखाधड़ी का आरोप लगाया। इस पर चुनाव आयोग ने तुरंत तथ्य-जांच करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।


राहुल गांधी का दावा – क्या कहा गया?

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया और अपने सार्वजनिक भाषणों में आरोप लगाया कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सूची में गड़बड़ी है। उनका कहना है कि:

  • एक ही मतदाता का नाम अलग-अलग जगह दर्ज है।
  • कुछ मृत व्यक्तियों के नाम अब भी मतदाता सूची में मौजूद हैं।
  • मतदाता सूची में फर्जी नाम जोड़कर चुनावी परिणामों को प्रभावित किया जा सकता है।

राहुल का आरोप था कि यह सब मिलकर वोटर फ्रॉड (Voter Fraud) की एक बड़ी साजिश का हिस्सा है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।https://indiacentralnews.com/wp-content


चुनाव आयोग का जवाब

चुनाव आयोग ने इन आरोपों को गंभीरता से लिया और अपनी फैक्ट-चेक टीम को जांच का निर्देश दिया। आयोग के अनुसार:

  1. मतदाता सूची का नियमित अपडेट – हर चुनाव से पहले मतदाता सूची का रिवीजन किया जाता है।
  2. शिकायत मिलने पर सत्यापन – किसी भी नागरिक या राजनीतिक दल की शिकायत मिलने पर तत्काल जांच की जाती है।
  3. डुप्लिकेट नाम हटाना – अगर किसी मतदाता का नाम दो जगह दर्ज है, तो उसे एक जगह से हटाया जाता है।

आयोग ने साफ किया कि राहुल गांधी द्वारा पेश किए गए कई उदाहरणों की जांच में अधिकांश दावे गलत या भ्रामक पाए गए


राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का असर

राजनीतिक दल चुनाव से पहले अपने समर्थकों को सक्रिय करने के लिए अक्सर चुनाव आयोग पर दबाव डालते हैं। इससे दो बातें होती हैं:

  • समर्थकों में ऊर्जा – कार्यकर्ताओं को लगता है कि उनके नेता चुनाव को ईमानदार बनाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।
  • विपक्ष पर दबाव – आरोप लगने से विपक्षी दल को सफाई देनी पड़ती है।

हालांकि, ऐसे आरोप अगर ठोस सबूतों के बिना लगाए जाएं, तो यह संस्था की साख को नुकसान पहुंचा सकते हैं।Home


मतदाता सूची में गड़बड़ी – वास्तविकता

भारत में मतदाता सूची बनाने का काम एक बड़ी और जटिल प्रक्रिया है। देश की विशाल जनसंख्या और लगातार हो रहे स्थानांतरण (Migration) के कारण यह चुनौतीपूर्ण है।

  • मृत व्यक्तियों के नाम हटाना – परिवार के सदस्यों की ओर से सूचना मिलने पर ही नाम हटाया जाता है।
  • डुप्लिकेट प्रविष्टियां – तकनीकी कारणों या पते बदलने से नाम दो बार दर्ज हो सकता है।
  • फर्जी नाम जोड़ना – यह अपराध है और इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है।
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राहुल गांधी बनाम चुनाव आयोग – पुराना विवाद

यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी और चुनाव आयोग के बीच ऐसा टकराव हुआ हो। इससे पहले भी: चुनाव आयोग

  • 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल ने EVM की सुरक्षा पर सवाल उठाए थे।
  • 2024 के आम चुनाव में उन्होंने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया था।

सोशल मीडिया पर बहस

राहुल गांधी के दावे के बाद ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #VoterFraud और #ElectionCommission ट्रेंड करने लगे।

  • समर्थक – राहुल के बयान को लोकतंत्र बचाने की कोशिश मानते हैं।
  • विरोधी – इसे महज राजनीतिक नाटक करार देते हैं।

चुनाव आयोग की पारदर्शिता बढ़ाने के कदम

चुनाव आयोग ने पिछले कुछ वर्षों में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं:

  1. ऑनलाइन वोटर लुकअप – कोई भी नागरिक अपने नाम की स्थिति ऑनलाइन देख सकता है।
  2. Voter Helpline App – शिकायत दर्ज करने और जानकारी पाने के लिए मोबाइल ऐप।
  3. आधार लिंकिंग – डुप्लिकेट एंट्री रोकने के लिए मतदाता सूची को आधार से जोड़ना।

निष्कर्ष

लोकतंत्र में चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है। राहुल गांधी जैसे नेता अगर आरोप लगाते हैं, तो उनकी जांच और सत्यापन जरूरी है। लेकिन, यह भी उतना ही जरूरी है कि आरोपों के साथ ठोस सबूत हों, ताकि जनता के बीच भ्रम न फैले।

चुनाव आयोग की इस त्वरित तथ्य-जांच ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली में गड़बड़ी के दावों को हल्के में नहीं लिया जाता।

राहुल गांधी का EC पर सवाल – ‘संविधान की शपथ के बाद हलफनामे की जरूरत क्यों

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग द्वारा हलफनामा मांगने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा मैंने संसद में संविधान की शपथ ली है फिर हलफनामे की क्या जरूरत जानिए इस बयान के पीछे की पूरी राजनीतिक पृष्ठभूमि और इसके मायने इस विस्तृत विश्लेषण में

परिचय: लोकतंत्र और जवाबदेही का द्वंद्व

भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में हर राजनीतिक प्रक्रिया को संविधान के दायरे में रहकर निष्पक्ष और पारदर्शी रूप से संचालित करना अत्यंत आवश्यक है। लेकिन जब किसी दिग्गज नेता द्वारा संस्थागत प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े किए जाते हैं तो बहस का नया दौर शुरू हो जाता है। हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग (Election Commission) पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा – मैंने संसद में संविधान की शपथ ली है फिर हलफनामे की जरूरत क्यों?

इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। आइए जानते हैं इस मुद्दे का विस्तृत विश्लेषण पृष्ठभूमि और राजनीतिक मायने।

मामले की पृष्ठभूमि

चुनाव आयोग ने राहुल गांधी से हाल ही में उनके एक सार्वजनिक बयान पर स्पष्टीकरण और शपथपत्र (Affidavit) की मांग की थी, जिसमें उन्होंने कथित रूप से किसी संवेदनशील मुद्दे पर टिप्पणी की थी। इस पर राहुल गांधी ने तीखा जवाब देते हुए कहा

मैं भारत का सांसद हूं, मैंने संसद में संविधान की शपथ ली है। वह शपथ ही मेरे लिए सर्वोच्च है। फिर बार-बार हलफनामा क्यों मांगा जा रहा है?

राहुल गांधी के इस बयान के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सांसद की संविधान शपथ ही पर्याप्त है या फिर कानूनी प्रक्रियाएं उससे अलग हैंindiacentralnewa.com

संविधान की शपथ बनाम चुनावी हलफनामा: क्या फर्क है

भारत के प्रत्येक सांसद को संसद में प्रवेश करने से पहले संविधान की शपथ लेनी होती है। यह शपथ उन्हें राष्ट्र संविधान और कानून के प्रति निष्ठा की शपथ दिलाती है। दूसरी ओर चुनाव लड़ते समय उम्मीदवारों को कई तरह के हलफनामे (Affidavits) देने होते हैं जैसे:

  • आपराधिक रिकॉर्ड
  • संपत्ति और देनदारियां
  • शैक्षणिक योग्यता
  • नागरिकता की पुष्टि

यह हलफनामे जनता की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए होते हैं।

राहुल गांधी का तर्क: राजनीतिक दृष्टिकोण

राहुल गांधी का कहना है कि बार-बार शपथपत्र की मांग करना उनकी सांसदीय गरिमा को ठेस पहुंचाता है और यह एक तरह का राजनीतिक दबाव हो सकता है। उनका यह बयान उस larger narrative का हिस्सा है जहाँ वे संस्थानों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठाते रहे हैं। चुनाव आयोग भारत

उनका तर्क यह भी है कि:

  • संविधान की शपथ सबसे बड़ी होती है।
  • बार-बार हलफनामा मांगना अविश्वास का संकेत है।
  • यह एक राजनीतिक हथकंडा हो सकता है।
चुनाव आयोग की भूमिका और जवाबदेही

चुनाव आयोग भारत में निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने वाली स्वतंत्र संस्था है। उसका दायित्व है कि वह हर उम्मीदवार से समान प्रक्रिया अपनाए और पारदर्शिता सुनिश्चित करे। यदि किसी प्रत्याशी का बयान या कार्य किसी कानूनी नियम का उल्लंघन करता है, तो चुनाव आयोग उससे जवाब मांग सकता है।

इस केस में आयोग का कहना है कि:

  • हलफनामा कानून के अनुसार मांगा गया है।
  • सभी उम्मीदवारों के लिए समान नियम हैं।
  • कोई भेदभाव नहीं किया गया है।
  • भारतीय राजनीति

यह कहना गलत नहीं होगा कि राहुल गांधी का यह बयान एक राजनीतिक रणनीति भी हो सकता है:

  • अपने समर्थकों को यह दिखाने का प्रयास कि वे संस्थागत अत्याचार के खिलाफ लड़ रहे हैं।
  • विपक्ष को यह संदेश देना कि सत्ता पक्ष द्वारा संस्थाओं का दुरुपयोग हो रहा है।
  • खुद को “संविधान का रक्षक” के रूप में पेश करना।

वहीं दूसरी ओर, सत्ता पक्ष इसे राहुल गांधी की जवाबदेही से भागने की कोशिश बता रहा है।


जनता की राय और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया

राहुल गांधी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया है:

  • एक वर्ग उनका समर्थन करते हुए कह रहा है कि यह सही समय है जब नेताओं को संस्थाओं के दुरुपयोग पर सवाल उठाना चाहिए।
  • वहीं दूसरा वर्ग यह मानता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं होता, चाहे वह सांसद हो या आम नागरिक।

कानूनी विशेषज्ञों की राय

कई संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • शपथ और हलफनामा दोनों की भूमिका अलग है।
  • संसद की शपथ सांसदीय कार्यों के लिए होती है।
  • जबकि हलफनामा कानूनी जवाबदेही और पारदर्शिता के लिए आवश्यक होता है।

यानी कि संविधान की शपथ देना किसी नेता को कानून के दायरे से मुक्त नहीं करता।


भविष्य की राजनीति पर असर

इस मुद्दे का असर आगामी चुनावों और राजनीतिक विमर्श पर पड़ सकता है:

  • कांग्रेस इस मुद्दे को संवैधानिक गरिमा का मामला बना सकती है।
  • विपक्ष इसे अकाउंटबिलिटी से भागना बता सकता है।
  • आम जनता के बीच राजनीतिक संस्थानों की साख और निष्पक्षता पर चर्चा बढ़ेगी।

निष्कर्ष: लोकतंत्र में सवाल उठाना जरूरी लेकिन जवाबदेही भी उतनी ही अनिवार्य

राहुल गांधी द्वारा उठाया गया सवाल वाजिब हो सकता है, लेकिन हलफनामा या शपथ जैसी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन भी उतना ही अनिवार्य है। लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाएं और उनकी प्रक्रियाएं एक मजबूत स्तंभ हैं, जिन्हें कमजोर नहीं किया जा सकता।

राहुल गांधी का यह बयान एक बड़ी बहस की ओर इशारा करता है – क्या संविधान की शपथ ही किसी नेता की जवाबदेही तय कर देती है? या फिर कानून के तहत जवाब देना भी उतना ही जरूरी है?

Breaking: उत्तराखंड में बादल फटने से तबाही जानें पूरी रिपोर्ट

उत्तराखंड में बादल फटने की ताज़ा घटना ने एक बार फिर कुदरत के क्रोध का अहसास कराया है। भारी बारिश और फ्लैश फ्लड से कई गांव प्रभावित हुए हैं, दर्जनों घर क्षतिग्रस्त और लोगों की जान-माल को भारी नुकसान हुआ है। जानिए पूरी रिपोर्ट, प्रभावित इलाकों की स्थिति और रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी जाने पूरी जानकारी और राहत कार्यो की स्थिति

घटना की शुरुआत:

रात करीब 2 बजे अचानक आसमान में गरज-चमक के साथ तेज बारिश शुरू हुई। देखते ही देखते बारिश इतनी तेज हो गई कि नदी-नालों में उफान आ गया। ग्रामीणों ने बताया कि “एक तेज धमाके जैसी आवाज आई, और उसके बाद पानी का सैलाब गांव में घुस आया कई घर तबाह हो गई

प्रभावित क्षेत्र

सबसे ज्यादा नुकसान उत्तरकाशी जिले के मोरी, नेलांग और बड़कोट इलाकों में हुआ है। यहाँ कई कच्चे-पक्के मकान पानी में बह गए। खेत, पुल और सड़कें पूरी तरह से टूट चुकी हैं। बिजली और मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह से ठप है, जिससे संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है

रेस्क्यू ऑपरेशन तेज:

मौसम विभाग ने आने वाले 48 घंटों में और बारिश की संभावना जताई है। राज्य सरकार ने चार जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है – उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली और रुद्रप्रयाग। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे नदी-नालों के पास न जाएं और सुरक्षित स्थानों पर रहें।

तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल:

घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर भयानक तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। इन दृश्यों में गांवों में पानी का रेला, बहते मकान और चीखते लोग दिखाई दे रहे हैं। कई नागरिक पत्रकारों ने मौके से लाइव स्ट्रीमिंग की, जिससे देशभर में इस आपदा की भयावहता सामने आई

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं:

राज्य के मुख्यमंत्री ने घटना पर दुख जताते हुए प्रभावितों को तत्काल राहत देने का आश्वासन दिया है। केंद्र सरकार ने भी हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया है। विपक्ष ने सरकार की आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, खासकर पहाड़ी इलाकों में अलर्ट सिस्टम की कमी को लेकर।

निष्कर्ष:

उत्तराखंड में बादल फटने और फ्लैश फ्लड की घटनाएं अब सामान्य होती जा रही हैं। यह केवल एक जलवायु परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि इंसानी लापरवाही का भी परिणाम है। समय आ गया है कि हम पर्वतीय राज्यों में स्थायी समाधान, सुरक्षित निर्माण और सशक्त आपदा प्रबंधन की ओर कदम बढ़ाएं।

ब्रेकिंग न्यूज़ कुबेरेश्वर धाम भगदड़ में 𝟐 की मौत अन्य जख्मी: किया हैं पूरी रिपोर्ट ?

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित कुबेरेश्वर धाम भगदड़ में आज एक दर्दनाक हादसा सामने आया जिससे पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई। प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की कांवड़ यात्रा से ठीक पहले यहां भारी भगदड़ की स्थिति बन गई जिसमें दो श्रद्धालु महिलाओं की मौत हो गई जबकि 10 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। अन्य लोगो हालत काफी बेहद संवेदनशील हैं

कैसे हुआ हादसा?

मिली जानकारी के अनुसार आयोजित कांवड़ यात्रा के चलते आज कुबेरेश्वर धाम में लाखों की संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए थे। आयोजन स्थल पर व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और भीड़ को नियंत्रित करने में स्थानीय प्रशासन विफल रहा।

कांवड़ यात्रा शुरू होने से ठीक पहले मुख्य प्रवेश द्वार पर भीड़ ने धक्का-मुक्की शुरू कर दी। कुछ महिलाएं फिसल गईं और देखते ही देखते भगदड़ का रूप ले लिया। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने हालात को संभालने की कोशिश की लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

मृतक और घायलों की स्थिति

मृतक: 2 महिलाएं (पहचान जारी)

घायल: 10+ लोग

गंभीर घायल: 2 (जिला अस्पताल, सीहोर में भर्ती

दृश्य बेहद भयावह

दूर दूर से आये हुवे लोग सब अपने लाइन में अस्थान ग्रहण कर रहे हैं भीड़ जायदा होने से पीछे से ढाका मुक्की होने लगे कुछ लोग जमीं पर गिर गए जैसे ही गीते सोर होने लगे भीड़ में महिला कुचले गए और महिला को मोके पर मौत होगयी

पंडित प्रदीप मिश्रा का बयान

घटना के बाद पंडित प्रदीप मिश्रा ने गहरा दुख जताते हुए कहा:

यह एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा है। मैं मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूँ और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।

अब आगे क्या?

घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं। पुलिस द्वारा एक एफआईआर दर्ज की गई है और सीसीटीवी फुटेज की मदद से भीड़ की गतिविधियों की समीक्षा की जा रही है।

राज्य सरकार ने राहत कार्यों के लिए अतिरिक्त बलों को तैनात किया है और भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए भीड़ नियंत्रण की नई गाइडलाइन तैयार करने की बात कही है।

निष्कर्ष

श्रद्धा के नाम पर जुटने वाली भीड़ जब अव्यवस्था में बदल जाती है, तो वह मौत का रूप ले लेती है। कुबेरेश्वर धाम की यह घटना एक गंभीर चेतावनी है — श्रद्धा ज़रूरी है, लेकिन प्रशासनिक सतर्कता उससे कहीं ज़्यादा ज़रूरी

प्रज्वल रेवन्ना को बलात्कार मामले में उम्र कैद: कोर्ट का बड़ा फैसला

कर्नाटक के सांसदों और विधायको विशेष अदालत ने अहम फैसला दिए जिसमे हासन से पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को बलात्कार मामले कोर्ट ने उम्र कैद का सजा सुनाया हैं आइये जानते हैं किया हैं पूरा मामला

प्रज्वल रेवन्ना रेप केस

पिछले साल प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ यौन उत्पीड़न के चार मामले दर्ज कराये जिसमे अभी तक एक मामले शुकवार सुनवाई की गई जिसमे एक विशेष वर्ग के अदालत ने दोषी साबित हुआ प्रज्वल रेवन्ना के घर में काम करने वाली 48 वर्षीय महिला के माध्यम से लगाये गये आरोपो में दोषी ठहराया गया हैं

महिला पुलिस अधिकारियों अपने टीम के साथ पूछ ताछ के लिए केआर नगर पहुंची एक फार्म हाउस पर केस करने वाली जिससे बचाया जा सके

कर्नाटक सांसद बलात्कार मामला

प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ पहली FIR 28 अप्रैल को एक महिला की शिकायत पर मामला दर्ज़ कराया गया था अब वह परिवार अपना घर छोड़ चूका हैं नजदीक के गांव पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रज्वल रेवन्ना रेप मामला दर्ज करवाया था

कर्नाटक के पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना।

आरोप: महिला के साथ बलात्कार और वीडियो रिकॉर्डिंग कर ब्लैकमेल करने का आरोप।

फैसला: कोर्ट ने प्रज्वल रेवन्ना को उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई।

मुआवजा: कोर्ट ने पीड़िता को ₹11.25 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया।

प्रतिक्रिया: यह फैसला महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

राजनीतिक असर: जेडीएस पार्टी और राज्य की राजनीति में हलचल।

Bihar votar list Update ;SIR के बाद Election commission का बड़ा अपडेट जानिए पूरा ख़बर

Bihar votar list;

बिहार वोटर लिस्ट जारी कर दिया गया हैं उसे राजनीतिक दलों को बाटने की प्रक्रिया चालू कर दिया हैं बिहार की सभी 38 जिलों में कलेक्टर वोटर ड्राफ्ट दे रहे हैं बिहार कुल 243 सीटों के 90,817 पोलिंग बूथ वोटर लिस्ट ड्राफ्ट इलेक्शन कमीशन ने तैयार किया गया हैं आप को बताये की राजनीतिक दलों में भी बहुत राजनीतिक हुई हैं

SIR;

बिहार वासीओ जिस वक़्त का इन्तिज़ार आखिर कार आहि चूका हैं SIR ड्राफ्ट लिस्ट आपने नाम देखने के लिए Election commission के साइट पर जाके SIR को लॉक करेंगे फिर votar पोर्टल सर्विस लॉगिन करेंगे votars.eci.gov.in/dwonload-?statecode=s04 on पेज करके जिसका जो जिला डालने के बाद फिर बिधानसभा एक रोल टाइप सेक्शन आएगा उसमे आपको SIR ड्राफ्ट 2025 को सलेक्ट करेंगे उसके बाद पार्ट्स संख्या आएगा सलेक्ट करेंगे उसके बाद पूरा का पूरा वोटर का नाम आजायेगा और असानी से अपना नाम ढूंढ पाइयेगाराजनीतिक दलों और बिहार के नागरिक इसका बिरोध पर्दशन किया जा रहा हैं इससे यह साफ पता चलता हैं की वोटो अधिकार छिना जा रहा हैं दिल्ली और बिहार में जोरो सौर से बिरुद्ध होने लगा हैं

Election Commission;

इलेक्शन कमीशन 3 बजे वोटर लिस्ट uplode कर दिया हैं ऐसे में माना जा रहा हैं किसी एक पार्टी समर्थन किया जरा रहा हैं इलेक्शन कमीशन द्वारा

विशेषताजानकारी
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फ़ाइल सबमिट की गईशुक्रवार, 01 अगस्त 2025
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जारी करने की तिथिशुक्रवार, 01 अगस्त 2025

डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा फैसला: भारतीय निर्यात परl 25% शुल्क, बाजार में मचा हड़कंप

नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय निर्यात पर 25% टैरिफ (शुल्क) लगाने की घोषणा के बाद भारतीय वित्तीय बाजारों में भारी उथल-पुथल देखी गई। इस फैसलेसे न केवल रुपया कमजोर हुआ बल्कि शेयर बाजार में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों के बीच चिंता का माहौल है और भारतीय निर्यात उद्योग पर इसका व्यापक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। बाजार की प्रतिक्रिया सोमवार को जैसे ही ट्रंप की घोषणा सामने आई, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में गिरावट का दौर शुरू हो गया। सेंसेक्स करीब 700 अंकों तकगिर गया, जबकि निफ्टी 200 अंकों से अधिक फिसल गया। विदेशी निवेशकों ने तेजी से पूंजी निकासी शुरू की, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ गया। रुपया भी कमजोर रुपये में भी तेज गिरावट देखी गई। डॉलर के मुकाबले रुपया 60 पैसे से ज्यादा कमजोर होकर 83.90 के आसपास पहुँच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका द्वारालगाए गए शुल्क लंबे समय तक बने रहे, तो भारतीय रुपया और ज्यादा दबाव में आ सकता है। ट्रंप का बयान डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा, “भारत लंबे समय से अमेरिका का फायदा उठा रहा है। अब वक्त आ गया है कि उनके निर्यात पर शुल्क लगाया जाए।25% टैरिफ भारतीय कंपनियों के लिए स्पष्ट संदेश है।” इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में भी हलचल देखी गई। भारतीय उद्योग पर प्रभाव भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात में वस्त्र, फार्मास्युटिकल्स, ऑटो पार्ट्स और आईटी सर्विसेज़ शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस टैरिफ से इन क्षेत्रों में बड़ा आर्थिक नुकसान होसकता है। टेक्सटाइल और फार्मा सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव की आशंका है। सरकार की प्रतिक्रिया भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, वाणिज्य मंत्रालय इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहा है और जल्दही अमेरिका के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। निष्कर्ष ट्रंप के इस फैसले ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव को बढ़ा दिया है। यदि यह नीति आगे भी जारी रहती है, तो इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूपसे पड़ सकता है। अब यह देखना होगा कि भारत इस चुनौती का किस तरह से जवाब देता है और अपने निर्यातकों को राहत कैसे प्रदान करता है।

डिंपल यादव पर टिप्पणी से मचा राजनीतिक विवाद

नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी (सपा) की वरिष्ठ नेता और सांसद डिंपल यादव पर एक मुस्लिम धर्मगुरु द्वारा की गई विवादित टिप्पणी ने देश की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दियाहै। इस बयान के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों ने संसद के भीतर और बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।भाजपा ने इस टिप्पणी को न केवल व्यक्तिगत अपमान बताया, बल्कि इसे समूची भारतीय नारी शक्ति और लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ बताया है। संसद के मानसून सत्र में इस मुद्देको जोरशोर से उठाया गया और विपक्ष की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए गए। क्या कहा गया था धर्मगुरु द्वारा? मुस्लिम धर्मगुरु का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने डिंपल यादव के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और असंवेदनशील भाषा का प्रयोग किया। बयान में धार्मिक और राजनीतिक भावनाओंको आहत करने वाले कई ऐसे शब्द थे जिन्हें लेकर न केवल राजनीतिक गलियारों में, बल्कि आम जनता में भी रोष फैल गया। भाजपा सांसदों का विरोध भाजपा के कई सांसदों ने इस बयान को “महिलाओं के खिलाफ मानसिकता” का उदाहरण बताया। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने संसद में इस विषय को उठाते हुए कहा,“डिंपल यादव किसी भी पार्टी से हों, वह एक महिला हैं, और उनका इस तरह से अपमान किया जाना अत्यंत निंदनीय है। हम इस मुद्दे को सिर्फ राजनीतिक नहीं, सामाजिक दृष्टि से देख रहे हैं।” संसद भवन के बाहर भाजपा महिला मोर्चा और अन्य सांसदों ने पोस्टर और बैनर लेकर प्रदर्शन किया। ‘महिलाओं का सम्मान, भारत की पहचान’ जैसे नारों के साथ विरोध दर्ज कराया गया। समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया? हालांकि सपा की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई, जिससे भाजपा ने विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए हैं। भाजपा का कहना है कि जब महिला सम्मान कीबात होती है, तो विपक्ष दोहरा रवैया अपनाता है। सोशल मीडिया पर समर्थन इस विवाद के बाद सोशल मीडिया पर #JusticeForDimpleYadav और #RespectWomen जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि यह घटना दर्शाती है कि राजनीति में भी अबव्यक्तिगत मर्यादा और महिला सम्मान को दरकिनार किया जा रहा है। निष्कर्ष डिंपल यादव पर विवादित टिप्पणी ने देशभर में महिला सुरक्षा, सम्मान और राजनीतिक शिष्टाचार को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। भाजपा ने इस मुद्दे को मजबूती से उठाकरमहिला सशक्तिकरण की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। अब देखना यह है कि सरकार और विपक्ष इस विवाद पर क्या कदम उठाते हैं।

अंसारुल्लाह ने शुरू किया ‘चौथा चरण’, ग़ज़ा में भुखमरी से हालात बेहद गंभीर – दिन 660 की रिपोर्ट

दिन 660: अंसारुल्लाह ने इज़राइल के खिलाफ ‘चौथे चरण’ की घोषणा की। ग़ज़ा में भुखमरी और मानवीय संकट गंभीर स्तर पर, महिलाओं व बच्चों की स्थिति बेहद चिंताजनक।


ग़ज़ा/सना, 28 जुलाई 2025इज़राइल-फ़िलिस्तीन युद्ध के 660वें दिन पर हालात और भी भयावह हो चुके हैं। यमन स्थित सशस्त्र संगठन अंसारुल्लाह ने इज़राइल के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को अब ‘चौथे चरण’ में प्रवेश देने की घोषणा कर दी है। यह निर्णय ग़ज़ा में जारी भुखमरी, नाकेबंदी और आम नागरिकों के बढ़ते जनसंहार के जवाब में लिया गया है।

ग़ज़ा में भुखमरी: हालात भयावह स्तर पर

ग़ज़ा में भुखमरी अब केवल मानवीय संकट नहीं, बल्कि एक रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल हो रही है। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इलाके में 59,733 लोग मारे गए हैं और 144,477 घायल हुए हैं। इनमें से अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं, जो सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।

ग़ज़ा के अस्पतालों में बिजली, दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी है। लोग पीने के पानी और खाने के लिए तरस रहे हैं। बच्चों के लिए दूध पाउडर और बुनियादी खाद्य सामग्री की आपूर्ति लगभग बंद है। सीमित हवाई राहत वितरण को स्थानीय प्रशासन ने “नाटकीय ढोंग” करार दिया है।

अंसारुल्लाह का ‘चौथा चरण’: पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर

अंसारुल्लाह (हूथी) ने चेतावनी दी है कि उनका ‘चौथा चरण’ पहले से अधिक सटीक और दूर तक मार करने वाले मिसाइलों और ड्रोन हमलों पर आधारित होगा। इस चरण में उनकी प्राथमिकता इज़राइली सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाना है।

उनका कहना है कि जब तक ग़ज़ा में महिलाओं और बच्चों का खून बहता रहेगा और जब तक नाकेबंदी जारी रहेगी, तब तक प्रतिरोध जारी रहेगा।

अंतरराष्ट्रीय चुप्पी और असहायता

दुनियाभर के मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र ने ग़ज़ा की स्थिति को लेकर चिंता जताई है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। ग़ज़ा के लोग 660 दिनों से भूख, मौत और तबाही के बीच फंसे हुए हैं, और वैश्विक समुदाय केवल बयानबाज़ी तक सीमित है।

दिन 660: एक और भयावह पड़ाव

दिन 660 एक और दुखद पड़ाव बन गया है। इस दिन ने यह साफ कर दिया है कि अगर कोई बड़ा राजनैतिक और मानवीय हस्तक्षेप नहीं होता, तो यह युद्ध और भी लंबा और विनाशकारी होगा। अंसारुल्लाह का ‘चौथा चरण’ इस संघर्ष को एक नए मोड़ पर ले जा सकता है।

नई दिल्ली में तेलंगाना के मुख्यमंत्री श्री रेवंत रेड्डी से मुलाकात

मुख्यमंत्री

नई दिल्ली में तेलंगाना के मुख्यमंत्री श्री रेवंत रेड्डी से मुलाकात – कांग्रेस के नेतृत्व में प्रगति का नया युग 2025 आज नई दिल्ली में तेलंगाना के माननीय मुख्यमंत्री श्री रेवंत रेड्डी और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात अत्यंत सुखद और प्रेरणादायक रही। यह केवल एक राजनीतिक भेंट नहीं थी, बल्कि यह उस परिवर्तनशील भारत की झलक भी थी, जिसे कांग्रेस पार्टी की दूरदर्शी नीतियाँ आकार दे रही हैं। तेलंगाना और कर्नाटक – दो महत्वपूर्ण राज्य – आज कांग्रेस के नेतृत्व में देश के विकास मॉडल का नया मानक स्थापित कर रहे हैं। कांग्रेस की गारंटियाँ – वादे नहीं, जिम्मेदारी तेलंगाना में कांग्रेस सरकार द्वारा घोषित छह गारंटियाँ अब सिर्फ घोषणाएँ नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत बन चुकी हैं। महिला सम्मान योजना, गृहलक्ष्मी स्कीम, रायथु ऋण माफी, बेरोजगारी भत्ता, 24×7 बिजली – ये सभी योजनाएं समाज के हर वर्ग तक राहत पहुंचा रही हैं। कर्नाटक में भी कांग्रेस सरकार की गारंटियाँ – जैसे कि गृह ज्योति, अन्न भाग्य, शक्ति योजना (महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा) – आम लोगों की ज़िंदगी में बड़ा बदलाव ला रही हैं। रिकॉर्ड-तोड़ विकास – कांग्रेस के विज़न का परिणाम तेलंगाना और कर्नाटक आज निवेश, रोजगार और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्य बन गए हैं। स्टार्टअप्स, डिजिटल इनोवेशन, कृषि सुधार और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में हो रही तरक्की यह साबित करती है कि कांग्रेस न केवल वादे करती है, बल्कि उन्हें व्यवहार में भी लाती है। तेलंगाना में उद्योगों को बढ़ावा, कृषि को समर्थन, और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार जैसे कदमों ने राज्य को प्रगति के पथ पर अग्रसर किया है। जन-केंद्रित शासन – असली लोकतंत्र की भावना कांग्रेस की सरकारें जनता को शासन का केंद्र मानती हैं। पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशिता – ये तीन स्तंभ कांग्रेस के प्रशासनिक मॉडल का मूल हैं। मुख्यमंत्री श्री रेवंत रेड्डी का नेतृत्व इसी विचारधारा को आगे बढ़ा रहा है। हर वर्ग की भागीदारी, खासकर महिलाओं, किसानों, युवाओं और कमजोर वर्गों की आवाज़ को शासन में शामिल करना ही कांग्रेस का उद्देश्य है। निष्कर्ष: नया भारत, नया युग आज जब देश के कई हिस्सों में शासन केवल प्रचार और इवेंट्स तक सीमित रह गया है, वहीं कांग्रेस नेतृत्व में तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्य असली विकास का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। यह एक नई शुरुआत है – जहां सरकारें जनता के लिए और जनता के साथ काम कर रही हैं।