बिहार चुनाव 2025 अपडेट: NDA बनाम महागठबंधन, वोटर लिस्ट और ई-EPIC डाउनलोड गाइड शानदार और जबरदस्त

बिहार चुनाव 2025

बिहार चुनाव 2025 LIVE अपडेट: दो चरणों में चुनाव, NDA vs महागठबंधन मुख्य मुकाबला। जानें वोटर लिस्ट चेक कैसे करें, E-EPIC वोटर कार्ड डाउनलोड करें, Bihar CEO Portal पर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और सभी ताज़ा चुनाव खबरें।

बिहार चुनाव 2025 LIVE अपडेट: NDA-महागठबंधन में सीधी टक्कर, वोटर लिस्ट और ई-EPIC डाउनलोड गाइड

बिहार चुनाव 2025 की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और राज्य का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ है। बिहार विधान सभा की कुल 243 सीटों पर दो चरणों में वोटिंग होगी, जिसकी शुरुआत 6 नवंबर 2025 से होगी। इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है क्योंकि मैदान में राष्ट्रीय दलों के साथ-साथ नई ताकतें भी उतर चुकी हैं।

बिहार चुनाव 2025 अपडेट

बिहार चुनाव 2025 में कौन-कौन मैदान में?

बिहार की राजनीति हमेशा गठबंधनों के सहारे चलती है और इस बार भी दो बड़े गुट आमने-सामने हैं:

एनडीए (NDA) गठबंधन

  • भारतीय जनता पार्टी (BJP)
  • जनता दल-यूनाइटेड (JDU)
  • लोक जनशक्ति पार्टी का NDA फ्रैक्शन
  • अन्य सहयोगी दल

महागठबंधन (Grand Alliance)

  • राष्ट्रीय जनता दल (RJD)
  • कांग्रेस
  • वामदलगठबंधन (CPI-ML, CPI, CPM)

अन्य उभरती ताकतें

  • जन सुराज पार्टी (Pawan Singh / Pappu Yadav influence)
  • AIMIM कुछ सीटों पर तीसरा फ्रंट बना सकती है
  • कई क्षेत्रीय शक्तियां भी सक्रिय हैं

बीजेपी का बड़ा आरोप — “बाहरी ताकतें राहुल गांधी को मोहरा बना रही

चुनावी बयानबाज़ी तेज़ हो चुकी है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि:

भारत की छवि खराब करने के लिए बाहरी शक्तियां राहुल गांधी को मोहरे की तरह इस्तेमाल कर रही हैं।

इस बयान के बाद बिहार का सियासी महासमर और गरमा गया है। वहीं विपक्ष का कहना है कि बीजेपी विकास मुद्दों से ध्यान हटाना चाहती है।

यह बयान बिहार चुनाव 2025 अपडेट में बड़ा राजनीतिक मोड़ माना जा रहा है।

बिहार चुनाव 2025
बिहार चुनाव 2025http://बिहार चुनाव 2025

बिहार चुनाव 2025 की मुख्य थीम — विकास, रोजगार और जातीय समीकरण

बिहार चुनाव 2025 में जो मुद्दे सबसे ज्यादा चर्चा में हैं:

  • युवाओं के लिए रोजगार और स्किल डेवलपमेंट
  • शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
  • महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण
  • जातीय समीकरण, सामाजिक न्याय
  • ग्रामीण सड़कों, पुल-पुलियों और बिजली व्यवस्था

बिहार चुनाव 2025 तारीखें और सीटें

पार्टिकुलरडिटेल
राज्यबिहार
विधानसभा सीटें243
कुल मतदान चरण2
पहला चरण6 नवंबर 2025
E-result / परिणामबाद में घोषित

बिहार चुनाव 2025 — वोटर लिस्ट में अपना नाम कैसे चेक करें

: CEO Bihar Portal के माध्यम से

अपना नाम मतदाता सूची में चेक करने और डिजिटल वोटर आईडी कार्ड डाउनलोड करने के लिए ये स्टेप फॉलो करें:

H4: Step-by-Step Guide

  1. Bihar CEO Portal खोलें
    ceoelection.bihar.gov.in
  2. Search in Electoral Roll / Elector’s Corner” पर क्लिक करें
  3. अपना EPIC No. (मतदाता पहचान संख्या) या नाम, जिला, विधानसभा क्षेत्र भरें
  4. नाम मिलते ही E-EPIC डाउनलोड करें
  5. PDF डाउनलोड कर प्रिंट भी कर सकते हैं

यदि आपकी जानकारी गलत हो या नाम गायब हो तो:

  • पोर्टल पर Correction/Claim फॉर्म भरें
    या
  • अपने स्थानीय निर्वाचन कार्यालय से संपर्क करें

मतदान के समय कौन-से दस्तावेज़ स्वीकार हैं?

आवश्यक पहचान दस्तावेज़

चुनाव आयोग (ECI) के अनुसार निम्न दस्तावेज़ मान्य हैं:

  • EPIC / वोटर आईडी कार्ड
  • पासपोर्ट
  • ड्राइविंग लाइसेंस
  • पेंशन दस्तावेज़ (फोटो सहित)
  • सरकारी सेवा पहचान पत्र
  • सरकारी योजनाओं का फ़ोटो कार्ड
  • आधार कार्ड (स्थिति के अनुसार)

नोट: वोटर लिस्ट में नाम ज़रूरी है, सिर्फ़ कार्ड से वोट नहीं पड़ेगा।

Bihar Election 2025: Social Media & Digital Campaigning सबसे बड़ी भूमिका

इस चुनाव में पहली बार:

  • AI आधारित डेटा एनालिसिस
  • सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अभियान
  • WhatsApp बूथ ग्रुप्स
  • डिजिटल रैली और वर्चुअल कन्वेंशन

बहुत बड़े पैमाने पर हो रहे हैं।https://indiacentralnews.com/औरंगाबाद-में-राहुल-गांधी/


युवा मतदाता — ‘किंगमेकर’ का नया युग

बिहार में 18-35 आयु वर्ग के वोटर सबसे अधिक हैं।
युवा मुद्दे:

  • नौकरी
  • स्किल ट्रेनिंग
  • सरकारी भर्ती कैलेंडर
  • स्टार्ट-अप सहायता

ये तय करेंगे कि सत्ता किसे मिलेगी।


बिहार चुनाव 2025 — निष्कर्ष

बिहार चुनाव 2025 में:

  • राजनीतिक टकराव चरम पर
  • विकास vs गठबंधन vs जातीय समीकरण
  • वोटर अवेयरनेस और ई-इलेक्शन सुविधाओं पर ज़ोर

मतदाताओं को जागरूक रहकर सही उम्मीदवार चुनना होगा।

Bihar Election 2025 FAQs

बिहार चुनाव कितने चरणों में होंगे?

दो चरणों में — 6 नवंबर 2025 से शुरू

कुल सीटें कितनी हैं?

243 विधानसभा सीटें

वोटर आईडी कैसे डाउनलोड करें?

ceoelection.bihar.gov.in पर E-EPIC डाउनलोड करें

: Call to Action

अपने वोट का इस्तेमाल ज़रूर करें — बिहार के भविष्य का फैसला आपके हाथ में है।

✅ मतदाता सूची चेक करें
✅ E-EPIC डाउनलोड करें
✅ पहचान पत्र साथ रखें
✅ वोटिंग दिन बूथ पर अवश्य जाएं

‎राजनाथ सिंह ने कहा – “राजद ने वैश्विक स्तर पर बिहार की छवि खराब की” | बिहार चुनाव 2025 में गरमाया सियासी माहौल

बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार राजनाथ सिंह

‎बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच दरभंगा और पटना में हुई रैलियों के दौरान केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राजद पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव का परिवार भ्रष्टाचार में डूबा है और राजद ने वैश्विक स्तर पर बिहार की छवि को धूमिल किया। राजनाथ सिंह ने लोगों से अपील की कि वे “जंगल राज” की वापसी नहीं होने दें और “विकसित बिहार” के लिए एनडीए को समर्थन दें। इस दौरान उन्होंने विपक्षी वादों को झूठा करार दिया और कहा कि हर घर नौकरी देना सिर्फ़ भ्रम है। साथ ही, तेजस्वी यादव द्वारा वक्फ संशोधन अधिनियम पर दिए बयान को लेकर भी केंद्र पर विपक्ष के आरोपों को गलत बताया।

‎राजनाथ सिंह का सीधा निशाना: “राजद ने बिहार की छवि धूमिल की”

दरभंगा में आयोजित एनडीए की चुनावी रैली में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राजद शासन के दौरान बिहार की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब हुई।
‎उन्होंने कहा, “लालू प्रसाद यादव का पूरा परिवार भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरा है। एक पूर्व मुख्यमंत्री को सालों जेल में रहना पड़ा — क्या यह हर बिहारी के लिए शर्म की बात नहीं है?

जंगल राज’ की वापसी नहीं होने दें: राजनाथ सिंह की जनता से अपील

राजनाथ सिंह ने लोगों से कहा कि बिहार के लोग तय करें — क्या वे “विकसित बिहार” चाहते हैं या “जंगल राज” की वापसी।
‎उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा पर कोई सवाल नहीं उठा सकता।

बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार राजनाथ सिंह
बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार राजनाथ सिंह

विकास बनाम भ्रष्टाचार: एनडीए का नारा

राजनाथ सिंह ने कहा कि बिहार में एनडीए सरकार ने विकास की नई लकीर खींची है, जबकि राजद शासन में भ्रष्टाचार, अपराध और कुशासन अपने चरम पर था।

‎उन्होंने आगे कहा कि बिहार में महिला सशक्तिकरण, गरीबी उन्मूलन और कृषि सुधार के लिए एनडीए सरकार ने अभूतपूर्व योजनाएं लागू की हैं।

विपक्ष के घोषणापत्र पर उठाए सवाल

‎राजनाथ सिंह ने विपक्ष के घोषणापत्र को “झूठा और अव्यावहारिक” करार दिया।
‎उन्होंने कहा, “हर घर सरकारी नौकरी देने का वादा पूरी तरह भ्रामक है। ऐसा कोई भी वादा जमीन पर संभव नहीं है।”
‎उन्होंने जनता से कहा कि विपक्ष के इन झूठे वादों में न फँसे और देशहित में सही निर्णय लें।https://x.com/rajnathsingh/status/1983505657945887071?t=9BZLr5MMWuNdY2iS6PcOdQ&s=19

तेजस्वी यादव पर वक्फ कानून को लेकर पलटवार
‎राजनाथ सिंह ने तेजस्वी प्रसाद यादव द्वारा वक्फ (संशोधन) अधिनियम को कूड़ेदान में फेंकने वाले बयान पर प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा, “जब प्रधानमंत्री मोदी ने देश के हर वर्ग के लिए योजनाएं चलाईं, तो उन्होंने कभी यह नहीं देखा कि कोई हिंदू है या मुस्लिम, महिला है या किसान। उनके लिए सब समान हैं।

मौसम ने बिगाड़ा कार्यक्रम: छपरा रैली रद्द

राजनाथ सिंह का शनिवार को छपरा में भी रैली करने का कार्यक्रम था, लेकिन चक्रवात ‘मोंथा’ के कारण खराब मौसम से उड़ान रद्द करनी पड़ी।
‎इसके बावजूद उन्होंने वीडियो संदेश के माध्यम से कहा कि वह जल्द ही छपरा की जनता से मुलाकात करेंगे और एनडीए के विज़न को साझा करेंगे।https://indiacentralnews.com/bihar-vidhansabha-election-2025-hot-seats/

एनडीए बनाम राजद: 2025 के चुनाव में क्या बदल जाएगा?

‎राजनाथ सिंह के बयानों से साफ है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए का मुख्य एजेंडा “विकास बनाम जंगल राज” रहेगा।
‎राजद इस चुनाव में तेजस्वी यादव के नेतृत्व में रोजगार और सामाजिक न्याय के मुद्दों को उठा रहा है, जबकि एनडीए सरकार के कामकाज को जनता के सामने रखकर वोट मांग रहा है।

‎राजनाथ सिंह के इस भाषण से एनडीए कार्यकर्ताओं में जोश है और राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह रैली चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार राजनाथ सिंह

अमित शाह पेश करेंगे नया विधेयक2025: PM-CM हटाने का कानून

(130वां संशोधन

गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में तीन बड़े विधेयक पेश करने जा रहे हैं, जिनमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को गंभीर अपराधों में गिरफ्तारी या दोषसिद्धि पर पद से हटाने का प्रावधान होगा। मौजूदा कानून में केवल दोषसिद्धि पर हटाने का प्रावधान है, लेकिन प्रस्तावित कानून के तहत यदि कोई प्रतिनिधि 30 दिनों तक हिरासत में रहता है, तो 31वें दिन उसे पद छोड़ना होगा या स्वतः हटाया जाएगा। इसमें संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश शासन (संशोधन) विधेयक शामिल हैं। विपक्ष ने इसे विपक्षी दलों को अस्थिर करने की साजिश बताया है।

गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में तीन बड़े विधेयक पेश करने जा रहे हैं
गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में तीन बड़े विधेयक पेश करने जा रहे हैं

प्रस्तावित कानून का उद्देश्य

गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में तीन अहम विधेयक पेश करने जा रहे हैं। इन विधेयकों के तहत एक नया तंत्र लागू करने का प्रस्ताव है, जिसके अनुसार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय या राज्य मंत्री अगर गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए जाते हैं या गिरफ्तार होते हैं, तो उन्हें अपने पद से हटना पड़ेगा। ये अपराध ऐसे होंगे जिनमें कम से कम 5 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो।

31 दिन का नियम

गृह मंत्री अमित शाह इस प्रस्ताव के मुताबिक, अगर कोई निर्वाचित प्रतिनिधि 30 दिनों तक हिरासत में रहता है, तो 31वें दिन से उसे या तो इस्तीफा देना होगा या उसे स्वचालित रूप से पद से हटा दिया जाएगा। यह प्रावधान पहली बार भारतीय राजनीतिक प्रणाली में जोड़ा जा रहा है, क्योंकि वर्तमान कानून में ऐसा कोई नियम नहीं है।

वर्तमान प्रणाली क्या कहती है?

फिलहाल की प्रणाली के तहत किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि को केवल तभी पद से हटाया जाता है जब वह दोषी करार दिया जाता है। गिरफ्तारी की स्थिति में ऐसे कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं।
उदाहरण के लिए, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आबकारी मामले में 6 महीने जेल में रहे, लेकिन उन्होंने जेल से ही सरकार चलाई। बाद में आतिशी को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई।
इसी तरह, झारखंड में चंपई सोरेन ने तब पदभार संभाला जब पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जमीन घोटाले के आरोप में जेल में थे।Contact

इस स्थिति को बदलने के लिए अमित शाह का यह नया विधेयक एक सख्त प्रावधान लाने जा रहा है।

प्रस्तावित प्रावधानों की खास बातें

यदि कोई मंत्री या मुख्यमंत्री 30 दिनों तक हिरासत में रहता है, तो स्वतः पद से हटाया जाएगा।

रिहाई के बाद राष्ट्रपति (केंद्र के लिए) या राज्यपाल (राज्य के लिए) फिर से नियुक्ति कर सकते हैं।

गंभीर अपराधों की परिभाषा वही रहेगी जिनमें 5 साल या अधिक की सजा का प्रावधान है।

तीन प्रमुख विधेयक

1. संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025:

यह विधेयक अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन करेगा। इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री और दिल्ली एनसीटी सरकार के मंत्रियों को हटाने का स्पष्ट प्रावधान बनाना है। PM-CM हटाने का कानून

2. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025

यह संशोधन जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 54 में बदलाव करेगा, जिससे मुख्यमंत्री या मंत्री को गिरफ्तारी या गंभीर अपराधों के मामले में हटाने का कानूनी आधार मिलेगा।

3. केंद्र शासित प्रदेशों का शासन (संशोधन) विधेयक, 2025

यह 1963 के केंद्र शासित प्रदेश शासन अधिनियम की धारा 45 में संशोधन करेगा, जिससे केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री और मंत्रियों को हटाने की प्रक्रिया तय होगी।

इन विधेयकों पर संसद में प्रक्रिया

इन विधेयकों को राज्यसभा और लोकसभा की संयुक्त समिति के पास भेजा जाएगा। इस समिति में लोकसभा के 21 सदस्य और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे। जैसे ही ये विधेयक सांसदों को भेजे गए, राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई


विपक्ष की तीखी आलोचना

कांग्रेस का आरोप – जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश

कांग्रेस के लोकसभा में उपनेता गौरव गोगोई ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:
“गृह मंत्री अमित शाह के ये विधेयक जनता का ध्यान राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा से हटाने का हताश प्रयास हैं… साफ है कि बिहार में बदलाव की हवाएं चल रही हैं।”

अभिषेक मनु सिंघवी ने उठाया बड़ा सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने इस प्रस्ताव को “एक दुष्चक्र” बताया। उन्होंने कहा:
“गिरफ्तारी के लिए कोई दिशा-निर्देश नहीं! विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी धड़ल्ले से और असमान रूप से हो रही है। नया प्रस्तावित कानून गिरफ्तारी होते ही मौजूदा मुख्यमंत्री आदि को तुरंत हटा देता है। विपक्ष को अस्थिर करने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया जाए, और चुनाव में हराने में असफल होने पर मनमानी गिरफ्तारियों से उन्हें हटाया जाए! सत्तारूढ़ दल के किसी भी मुख्यमंत्री को कभी नहीं छुआ गया!”


क्या यह विधेयक राजनीतिक अस्थिरता बढ़ाएगा?

गृह मंत्री अमित शाह विशेषज्ञों का कहना है कि इस कानून से सत्ता पक्ष को विपक्ष को कमजोर करने का हथियार मिल सकता है। गिरफ्तारी के बाद हटाने का प्रावधान उन राज्यों में बड़ा असर डाल सकता है जहां गठबंधन सरकार या कमजोर बहुमत है।


सरकार का तर्क – साफ सुथरी राजनीति का प्रयास

केंद्र सरकार का तर्क है कि यह कानून राजनीति में स्वच्छता लाने के लिए है। गृह मंत्रालय गृह मंत्री अमित शाह के अधिकारियों के अनुसार, “गंभीर अपराधों में आरोपित नेताओं को पद पर बने रहना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।”


सवाल – दुरुपयोग रोकने के लिए क्या प्रावधान होंगे?

गृह मंत्री अमित शाह कानून विशेषज्ञों का कहना है कि अगर गिरफ्तारी ही हटाने का आधार बनेगी, तो दुरुपयोग का खतरा रहेगा। ऐसे में जरूरी है कि गिरफ्तारी के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश, न्यायिक निगरानी और समीक्षा तंत्र का प्रावधान हो।

Bihar Metro Letest News 2025:पटना मेट्रो प्रोजेक्ट निरीक्षण CM नीतीश कुमार

nitish kumar

CM नीतीश कुमार ने पटना मेट्रो प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया, बैरिया टर्मिनल व जीरोमाईल स्टेशन का दौरा कर अधिकारियों को निर्माण कार्य तेज करने के निर्देश दिए।

पटना मेट्रो रेल परियोजना

पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को पटना मेट्रो रेल परियोजना (Patna Metro Rail Project) की प्रगति का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को लगातार मॉनिटरिंग करने और निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने बैरिया स्थित मेट्रो टर्मिनल और जीरोमाईल स्टेशन का भी दौरा किया और प्रगति की जानकारी ली।

मेट्रो डिब्बों और ट्रैक का किया निरीक्षण

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना मेट्रो रेल परियोजना की प्रगति पर विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मेट्रो डिब्बों, रेलवे ट्रैक, यार्ड और पावर ग्रिड की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि सभी निर्माण कार्य समय पर और सुचारू तरीके से पूरे हों।

:पटना मेट्रो प्रोजेक्ट निरीक्षण
nitish kumarhttp://:पटना मेट्रो प्रोजेक्ट निरीक्षण

यार्ड और पावर ग्रिड की भी ली जानकारी

अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बैरिया स्थित पटना मेट्रो टर्मिनल परिसर में ही मेट्रो रेल का ठहराव, रखरखाव और साफ-सफाई की व्यवस्था होगी। यहीं पर बने प्रशासनिक भवन से मेट्रो रेल के सुचारू संचालन का प्रबंधन किया जाएगा।

जीरोमाईल स्टेशन पर सुविधाओं का अवलोकन

निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री जीरोमाईल मेट्रो स्टेशन पहुंचे और वहां चल रहे निर्माण कार्य की प्रगति एवं मौजूदा स्थिति की जानकारी ली। नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह ने स्टेशन पर उपलब्ध होने वाली सुविधाओं जैसे स्वचालित सीढ़ी, टिकट काउंटर, यात्री सुविधाएं, लिफ्ट, प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के रास्ते और अन्य पब्लिक एरिया की जानकारी दी।

अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री ने कहा कि पटना मेट्रो निर्माण कार्य को लेकर हम लगातार निरीक्षण करते रहेंगे ताकि सभी काम बेहतर ढंग से पूरे हों। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि निर्माण में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए और कार्य समय सीमा के भीतर पूरा होना चाहिए।https://indiacentralnews.com/bihar-metro-letest-news-2025/

निरीक्षण में मौजूद रहे वरीय अधिकारी

इस मौके पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, पटना प्रमंडल के आयुक्त डॉ. चंद्रशेखर सिंह, जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम सहित पटना मेट्रो रेल परियोजना से जुड़े अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।Home

औरंगाबाद में राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा में हंगामा2025: महागठबंधन विधायकों के खिलाफ नारेबाजी, जानिए पूरी रिपोर्ट

Aurangabad 2

औरंगाबाद में राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के दौरान महागठबंधन विधायकों के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। जानिए क्या है विवाद की पूरी कहानी।

औरंगाबाद
Aurangabad 2

औरंगाबाद में राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा में बवाल क्यों हुआ?

राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा देशभर में सुर्खियों में है। यह यात्रा लोकतंत्र को मजबूत करने और मतदाताओं के अधिकारों की आवाज उठाने के लिए निकाली गई है। लेकिन बिहार के औरंगाबाद जिले में यह यात्रा विवादों में घिर गई। महागठबंधन के दो प्रमुख विधायकों के खिलाफ स्थानीय लोगों ने जमकर नारेबाजी की।

घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं, आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी कि अपने ही गठबंधन के विधायकों के खिलाफ जनता सड़कों पर आ गई? आइए पूरी जानकारी विस्तार से समझते हैं।

क्या है पूरा मामला?

18 अगस्त 2025 को राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की संयुक्त वोटर अधिकार यात्रा औरंगाबाद पहुंची। यात्रा की शुरुआत देव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद हुई। मंदिर से बाहर निकलते ही भीड़ ने राहुल और तेजस्वी का स्वागत किया, लेकिन कुछ ही देर में माहौल बदल गया।

आनंद शंकर के खिलाफ नारेबाजी

राहुल गांधी का काफिला जब देव के एक स्थान से गुजर रहा था, तभी भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने स्थानीय विधायक आनंद शंकर के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। नारे थे – “आनंद शंकर मुर्दाबाद”, “हमारा नेता कौन हो – जो काम करे”.

रफीगंज में विरोध और रास्ता रोकना

यात्रा रफीगंज पहुंची, जहां स्थिति और बिगड़ गई। वहां के स्थानीय विधायक मोहम्मद नेहालुद्दीन के खिलाफ लोगों ने सड़क जाम कर दिया और उनके काफिले को रोक लिया। लोगों ने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के बाद विधायक पूरी तरह गायब हो गए, जनता से संवाद बंद कर दिया और विकास के वादे पूरे नहीं किए।

सुरक्षाकर्मियों ने किया बीच-बचाव

रफीगंज में जब माहौल तनावपूर्ण हो गया, तब विधायक के सिक्योरिटी गार्ड्स ने बीच-बचाव किया। गुस्साई भीड़ ने विधायक से सवाल किए – “आपका फोन क्यों नहीं उठाते?” इस पर विधायक को सुरक्षाकर्मी तुरंत गाड़ी में बैठाकर वहां से निकाल ले गए।

लोगों के आरोप क्या हैं?

जनता का गुस्सा सिर्फ नारों तक सीमित नहीं रहा। लोगों ने कई गंभीर आरोप लगाए, जिनमें शामिल हैं:

  • चुनाव जीतने के बाद गायब होना – जनता का कहना है कि विधायक चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र में नजर ही नहीं आए।
  • फोन रिसीव नहीं करना – आरोप है कि वे फोन नहीं उठाते और अगर कभी उठाते हैं तो उल्टा जवाब देते हैं।
  • वायरल ऑडियो – एक पुराना ऑडियो भी सामने आया जिसमें विधायक ने कथित तौर पर कहा था कि “मैं आपका विधायक नहीं हूं”.
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो

देव और रफीगंज दोनों घटनाओं के वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। लोग इस मुद्दे पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे जनता की नाराजगी का संकेत बता रहे हैं, तो कुछ इसे महागठबंधन की अंदरूनी कमजोरी मान रहे

राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया

अब सवाल उठता है कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने इस पूरे मामले पर क्या कहा? फिलहाल, दोनों नेताओं ने यात्रा के मुद्दे पर ही बात की और कहा कि यह यात्रा लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए है। लेकिन स्थानीय स्तर पर बढ़ता असंतोष निश्चित रूप से महागठबंधन के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

राजनीतिक विश्लेषण: बड़ा संकेत या सिर्फ स्थानीय गुस्सा?

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह सिर्फ स्थानीय गुस्सा नहीं, बल्कि वोटर अधिकार यात्रा के दौरान जनता को अपने मन की बात कहने का मौका मिला। जब बड़े नेता मौजूद होते हैं, तो जनता अपनी नाराजगी खुलकर जताती है।
लेकिन क्या यह घटना आने वाले चुनावों पर असर डालेगी? संभव है, क्योंकि आज के डिजिटल युग में एक वीडियो भी चुनावी माहौल को बदल सकता है।


महागठबंधन के लिए खतरे की घंटी

बिहार में महागठबंधन पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में अपने ही विधायकों के खिलाफ जनता का गुस्सा सामने आना एक बड़ा संकेत है। अगर यह नाराजगी बढ़ी तो आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है।https://indiacentralnews.com/auto-draft/


यात्रा का मकसद और बढ़ता दबाव

राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा का मकसद था लोगों को यह संदेश देना कि उनका वोट सिर्फ मतदान तक सीमित नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों से जवाबदेही भी मांगता है।
लेकिन औरंगाबाद की घटना ने यह साफ कर दिया कि जनता सिर्फ भाषणों से संतुष्ट नहीं है। उन्हें काम चाहिए, जवाबदेही चाहिए।

Aurangabad 2
Aurangabad 2

पटना में सुशासन फेल? 19 साल के छात्र की गोली मारकर हत्या से मचा हड़कंप

बिहार की राजधानी पटना में भी सुशासन फेल हो चुका है

पटना में सुशासन पर सवाल! बीच शहर 19 वर्षीय छात्र को गोली मारकर हत्या, 4 दिन में दूसरा मर्डर। पुलिस जांच में जुटी। पूरी खबर पढ़ें।

पटना में सुशासन फेल? 19 वर्षीय छात्र की गोली मारकर हत्या से मचा हड़कंप

बिहार की राजधानी पटना में कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। सुशासन और अपराध मुक्त बिहार का दावा करने वाली सरकार के दावों की पोल तब खुल गई जब 19 साल के एक छात्र की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह वारदात ऐसे समय हुई है जब अभी कुछ दिन पहले ही पटना में एक युवक की चाकू से हत्या हुई थी।

बिहार की राजधानी पटना में भी सुशासन फेल हो चुका है
बिहार की राजधानी पटना में भी सुशासन फेल हो चुका है

क्या है पूरा मामला?

रविवार सुबह की यह घटना पटना के गर्दनीबाग थाना क्षेत्र के सरिस्ताबाद मोड़ के पास हुई। जानकारी के मुताबिक, मृतक छात्र की पहचान राज कृष्णा के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि सुबह 9 बजे के करीब अज्ञात अपराधियों ने युवक को गोली मार दी। गोली लगते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल छात्र को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस वारदात के बाद इलाके में तनाव का माहौल है और लोग कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।

एफएसएल और डॉग स्क्वाड मौके पर

पटना पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वाड को मौके पर बुलाया। घटनास्थल से कारतूस के खोखे भी बरामद किए गए हैं। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और अपराधियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।

पुलिस का आधिकारिक बयान

पुलिस ने बताया, “सुबह 9 बजे सूचना मिली कि सरिस्ताबाद मोड़ के पास एक युवक को गोली मारी गई है। टीम तुरंत मौके पर पहुंची और घायल को अस्पताल भेजा गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। फिलहाल एफएसएल टीम और डॉग स्क्वाड की मदद से जांच की जा रही है।”

अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अनु कुमारी ने कहा कि घटना के पीछे के कारणों का पता लगाया जा रहा है और अपराधियों की तलाश जारी है।

4 दिन में दूसरी हत्या, सुशासन पर सवाल

महज चार दिन पहले, 14 अगस्त को पटना में एक युवक की चाकू मारकर हत्या की गई थी। उस मामले में पुलिस ने दावा किया कि 12 घंटे के भीतर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन अब फिर एक नई वारदात ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लगातार हो रही घटनाओं ने आम जनता में भय का माहौल पैदा कर दिया है। लोग सोशल मीडिया पर सरकार से सवाल पूछ रहे हैं कि “कहां गया सुशासन?

पटना में बढ़ता अपराध ग्राफ

बिहार में हाल के वर्षों में अपराध के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। राजधानी पटना में आए दिन हत्या, लूट, और गोलीबारी जैसी वारदातें सामने आ रही हैं। सरकार भले ही अपराधियों पर सख्त कार्रवाई के दावे कर रही हो, लेकिन हालिया घटनाएं कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।


लोगों का गुस्सा और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर #Patna और #BiharLawOrder ट्रेंड करने लगा। लोग ट्वीट कर रहे हैं कि पटना में कानून-व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है। कई यूजर्स ने सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की।


क्यों उठ रहे हैं सवाल सुशासन पर?

नीतीश कुमार सरकार ने हमेशा सुशासन का नारा दिया है। लेकिन जब राजधानी पटना में इस तरह की वारदातें होती हैं, तो यह नारा खोखला साबित होता है। 4 दिन में दो हत्याएं होना सरकार के लिए बड़ा अलार्म है।


क्या कह रही है पुलिस?

पुलिस ने अभी तक किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और जल्द ही अपराधियों को पकड़ लिया जाएगा।

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि बिहार में कानून-व्यवस्था की हालत कितनी खराब हो चुकी है। खासकर राजधानी पटना में, जहां आम लोगों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए थी।https://indiacentralnews.com/

पुतिन का ट्रंप से गर्मजोशी भरा स्वागत, यूक्रेन की कड़ी प्रतिक्रिया: क्या दुनिया तर्कहीन हो रही है?”

putin and trump

अलास्का में ट्रंप-पुतिन शिखर सम्मेलन में लाल कालीन और हैंडशेक ने यूक्रेन को नाराज़ किया। जानिए क्यों इस बैठक पर उठे सव

परिचय: ट्रंप-पुतिन मुलाकात और दुनिया की प्रतिक्रिया

अलास्का में आयोजित ट्रंप-पुतिन शिखर सम्मेलन ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया। इस बैठक के दौरान अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का गर्मजोशी भरा स्वागत किया। लाल कालीन, ताली बजाकर अभिवादन और एक दोस्ताना हैंडशेक ने इस मुलाकात को खास बना दिया। लेकिन यही दृश्य यूक्रेन और उसके समर्थकों के लिए एक चुभने वाला पल साबित हुआ।

कई विशेषज्ञों और आम लोगों ने सवाल उठाया कि एक ऐसे नेता को, जिस पर युद्ध अपराधों के आरोप हैं और जो लाखों लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार माना जाता है, उसे इतनी शानो-शौकत से क्यों स्वागत किया गया?

 ट्रंप-पुतिन
putin and trump

अलास्का में शिखर सम्मेलन: एक दिखावटी जीत?

शुक्रवार की रात यूक्रेनी लोग इस चिंता के साथ सोए कि कहीं यह मुलाकात यूक्रेन युद्ध को लेकर किसी बड़े समझौते में न बदल जाए। लेकिन शनिवार सुबह उन्हें राहत मिली कि बैठक किसी बड़े राजनीतिक या रणनीतिक समझौते के बिना ही समाप्त हो गई।

हालांकि, भले ही कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ, पर “ऑप्टिक्स” यानी मुलाकात का दृश्य और माहौल चर्चा का विषय बन गया। अमेरिकी सैनिकों द्वारा बिछाया गया लाल कालीन, ट्रंप का पुतिन को गले लगाना और कार में अकेले बैठकर बातचीत करना—ये सब संकेत दुनिया को एक अलग ही तस्वीर दिखा रहे थे।https://indiacentralnews.com/wp-content/uploads/2025/08/putin-and-trump-scaled.avif


यूक्रेन की नाराज़गी और जनता की आवाज़

यूक्रेन में इस दृश्य ने लोगों के दिलों को चोट पहुंचाई। कीव की 40 वर्षीय वकील मारिया द्राचोवा ने कहा:
“अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में औपचारिकता आम है, लेकिन यह लाल कालीन और सम्मान एक ऐसे व्यक्ति के लिए था जो लाखों मौतों का जिम्मेदार है। दुनिया तर्कहीन व्यवहार कर रही है।”

यही नहीं, कई यूक्रेनी नागरिकों ने कहा कि इस तरह का स्वागत पुतिन की वैधता को बढ़ावा देता है। ओलेक्सांद्र कोवालेंको, एक लेखक और राजनीतिक विश्लेषक, ने कहा:
“यह एक युद्ध अपराधी की इमेज को सामान्य बनाने जैसा है। इस स्तर की शानो-शौकत की कोई जरूरत नहीं थी। बैठक सादगी से होनी चाहिए थी।Contact

पुतिन की मुस्कान और यूक्रेन का दर्द

सबसे ज्यादा चुभने वाली बात थी पुतिन का व्यवहार। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वह नागरिकों की हत्या रोकेंगे, तो उन्होंने हल्की मुस्कान दी और कान पर हाथ रखकर ऐसा दिखाया जैसे उन्होंने सुना ही नहीं।

यूक्रेनी नागरिक सेर्ही ऑर्लिक, जिन्होंने दो बार अपना घर खोया है, कहते हैं:
“मैंने यह दृश्य देखा तो मैं टूट गया। मैंने रिश्तेदार खोए हैं। प्रोटोकॉल जरूरी हो सकता है, लेकिन यह बहुत अप्रिय था—खासकर पुतिन की मुस्कान।”

प्रेस कॉन्फ्रेंस और कूटनीतिक संदेश

बैठक के बाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस भी चर्चा में रही। ट्रंप ने पुतिन को पहले बोलने दिया, और पुतिन ने आठ मिनट तक अपनी बात रखी। उन्होंने युद्ध की शुरुआत पर एक शब्द भी नहीं कहा। इसके विपरीत, ट्रंप बहुत ही संक्षेप में बोले और निराश दिखे।

रूस विशेषज्ञ कियर गाइल्स ने कहा:
“पुतिन के लिए यह शिखर सम्मेलन उतरने से पहले ही जीत थी। उन्हें ऐसे सम्मानित किया गया जैसे वह एक सामान्य राष्ट्राध्यक्ष हों, जबकि वह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वांछित युद्ध अपराधी हैं।”

यूरोप और अमेरिका की रणनीति पर सवाल

यूरोपीय नेता इस तरह का कदम नहीं उठाते। वे इस घटना से और सतर्क हो जाएंगे कि पुतिन की मांगों को मान्यता न दी जाए। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने भी कहा कि यूरोपीय नेताओं को हर स्तर पर सक्रिय रहना होगा।

ज़ेलेंस्की अगले हफ्ते वॉशिंगटन जा रहे हैं, जहां वह शांति की दिशा में ऐसा रास्ता तलाशने की कोशिश करेंगे जिसमें रूस की आक्रामक मांगों के आगे झुकना न पड़े।

क्या यह ट्रंप की रणनीति है या मनमानी?

ओलेक्सांद्र कोवालेंको का मानना है:
“शायद यह सब पुतिन को खुश करके कोई बड़ी रणनीति लागू करने की कोशिश है। लेकिन मुझे शक है। यह शायद ट्रंप की मनमानी है, बिना किसी ठोस योजना के।”

लाल कालीन के पीछे की राजनीति

ट्रंपपुतिन मुलाकात में कोई ठोस समझौता नहीं हुआ, लेकिन इस शिखर सम्मेलन ने वैश्विक राजनीति में बहस जरूर पैदा कर दी। क्या यह मुलाकात पुतिन की इमेज को सुधारने का एक प्रयास थी? या यह सिर्फ दिखावा था?

एक बात साफ है कि यूक्रेन और उसके समर्थकों के लिए यह दृश्य बहुत ही दर्दनाक था। दुनिया को यह सोचना होगा कि तर्क और न्याय के पैमानों पर राजनीति कितनी संवेदनशील हो रही है।

बिहार चुनाव के बाद NDA के वादे – हकीकत या सिर्फ बातें?

Bihar election

“बिहार चुनाव में NDA ने जो बड़े-बड़े वादे किए थे, क्या वे पूरे हुए? इस आर्टिकल में पढ़ें NDA के वादों की सच्चाई और हकीकत।”

बिहार चुनाव के बाद NDA के वादे – हकीकत या सिर्फ बातें

बिहार की राजनीति हमेशा सुर्खियों में रहती है। हर चुनाव में पार्टियां जनता के सामने ढेरों वादे करती हैं, जिन पर जनता भरोसा कर अपना वोट देती है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने कई बड़े-बड़े वादे किए थे। लेकिन आज, 2025 में सवाल यह है कि क्या वो वादे पूरे हुए या सिर्फ चुनावी जुमले साबित हुए? आइए विस्तार से जानते हैं।https://indiacentralnews.com/wp-content/uploads/2025/08/Bihar-election.webp

NDA ने चुनाव के समय क्या वादे किए थे?

2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए ने अपना घोषणा पत्र जारी किया था। इसमें कुछ प्रमुख वादे शामिल थे:

  • 19 लाख नौकरियों का वादा
  • महिलाओं को रोजगार के अवसर
  • स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
  • बेहतर शिक्षा व्यवस्था
  • सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
  • किसानों को आर्थिक सहायता और सिंचाई व्यवस्था में सुधार

इन वादों ने जनता का ध्यान खींचा और अंततः एनडीए को जीत भी दिलाई।

क्या वादे पूरे हुए? हकीकत की पड़ताल

1. रोजगार का वादा – कितना पूरा हुआ?

सबसे बड़ा वादा था 19 लाख नौकरियों का। हालांकि सरकार ने कई भर्ती प्रक्रियाएं शुरू कीं, लेकिन वास्तविक आंकड़ों में बड़ी कमी रही। कुछ सरकारी पदों पर बहाली हुई, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में रोजगार सृजन उम्मीद से कम रहा। बेरोजगारी दर में भी बड़ी गिरावट नहीं आई।

2. महिलाओं के लिए योजनाएं

महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूह और स्टार्टअप योजनाएं शुरू की गईं, लेकिन इनके लाभ सीमित लोगों तक ही पहुंचे। हालांकि शिक्षा में बेटियों की संख्या बढ़ी है।

3. स्वास्थ्य सेवाओं का हाल

कोविड-19 के समय सरकार ने स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश किया, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है। बड़े अस्पतालों की संख्या बढ़ी, पर डॉक्टरों की कमी अब भी एक बड़ी समस्या है।

4. शिक्षा व्यवस्था में बदलाव

स्कूलों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत और शिक्षक नियुक्ति जैसी योजनाएं चलाई गईं, लेकिन जमीनी स्तर पर गुणवत्ता सुधारना अब भी चुनौती है।

5. किसानों के लिए योजनाएं

सरकार ने सिंचाई और फसल बीमा योजनाओं पर जोर दिया, लेकिन बारिश पर निर्भरता कम नहीं हुई। किसान आज भी लागत बढ़ने से परेशान हैं।Home

जनता की राय – भरोसा टूटा या कायम?

लोगों का कहना है कि कुछ वादे पूरे हुए, लेकिन बड़े वादों पर काम अधूरा है। खासकर बेरोजगारी के मुद्दे पर नाराजगी बनी हुई है। वहीं, सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार को लेकर सरकार को सराहा भी जा रहा है।

सोशल मीडिया और विपक्ष का रुखसोशल मीडिया पर विपक्ष लगातार NDA पर वादाखिलाफी का आरोप लगाता रहा है। ट्विटर (अब X) और फेसबुक पर बेरोजगारी, महंगाई जैसे मुद्दे ट्रेंड करते रहते हैं। विपक्ष ने 2025 के चुनाव से पहले इस मुद्दे को और तेज कर दिया है।


Bihar election
Bihar election

अगले चुनाव पर असर पड़ेगा?

2025 के चुनाव से पहले यह मुद्दा बेहद गर्म है। अगर जनता को लगे कि उनके साथ वादाखिलाफी हुई है, तो यह एनडीए के लिए नुकसानदायक हो सकता है।Contact


निष्कर्ष

एनडीए के वादे पूरे भी हुए और अधूरे भी। कुछ कामों की तारीफ होती है, लेकिन बड़े वादे जैसे 19 लाख नौकरियों का वादा आज भी सवालों के घेरे में हैं। अब देखना होगा कि 2025 में जनता इन अधूरे वादों का हिसाब कैसे लेती है।

स्वतंत्रता दिवस 2025: 15 अगस्त का इतिहास, महत्व और मनाने का सही तरीका

15 august happy independence day 2025

स्वतंत्रता दिवस 2025 पर जानिए 15 अगस्त का इतिहास, इसका महत्व और इसे मनाने के सही तरीके। देशभक्ति संदेश, भाषण, नारे और रोचक तथ्य पढ़ें। 79वें स्वतंत्रता दिवस को खास बनाने के लिए आइडियाज जानें।”

भूमिका: क्यों खास है 15 अगस्त 2025?

भारत का स्वतंत्रता दिवस हर भारतीय के लिए गर्व का अवसर है। 15 अगस्त 1947 को हमारा देश अंग्रेज़ों की गुलामी से आज़ाद हुआ था। तब से लेकर हर साल 15 अगस्त को हम अपने शहीदों को याद करते हैं और देश के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करते हैं। साल 2025 में हम आजादी के 79 साल पूरे कर रहे हैं, जो हमारे लिए एक ऐतिहासिक पल है। 15 अगस्त

15 अगस्त का इतिहास: आज़ादी की लंबी लड़ाई

भारत की आज़ादी का इतिहास बलिदान और संघर्ष से भरा हुआ है। 18वीं शताब्दी के अंत से ही अंग्रेज़ों का भारत पर नियंत्रण बढ़ने लगा। इस गुलामी के खिलाफ कई आंदोलन और क्रांतियां हुईं।

  • 1857 की पहली क्रांति: इसे भारत की पहली आज़ादी की लड़ाई माना जाता है। मंगल पांडे जैसे वीरों ने ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी।
  • कांग्रेस का गठन और आंदोलन: 1885 में इंडियन नेशनल कांग्रेस बनी, जिसने आज़ादी के लिए राजनीतिक संघर्ष शुरू किया।
  • महात्मा गांधी का नेतृत्व: असहयोग आंदोलन (1920), सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) और भारत छोड़ो आंदोलन (1942) ने आज़ादी की लड़ाई को गति दी।
  • शहीदों का योगदान: भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, सुखदेव, राजगुरु जैसे वीरों ने हंसते-हंसते अपनी जान न्योछावर कर दी।

अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ और पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले से पहला तिरंगा फहराया।

स्वतंत्रता दिवस का महत्व

आज का दिन सिर्फ छुट्टी नहीं है, बल्कि यह हमें हमारी आज़ादी की कीमत और शहीदों के बलिदान की याद दिलाता है। यह दिन हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हमने देश के लिए क्या किया और आगे क्या कर सकते हैं।

  • राष्ट्रीय एकता का प्रतीक
  • देशभक्ति की भावना जगाने वाला अवसर
  • युवाओं के लिए प्रेरणा का दिन
स्वतंत्रता दिवस 2025 15 अगस्त कैसे मनाएं?

2025 का स्वतंत्रता दिवस खास है क्योंकि यह हमारी 79वीं वर्षगांठ है। इसे खास बनाने के लिए आप निम्नलिखित तरीकों से इसे मना सकते हैं:Contact

1. तिरंगा फहराना और राष्ट्रगान गाना

स्कूल, ऑफिस, सोसाइटी और घरों में तिरंगा फहराकर राष्ट्रगान गाना सबसे बड़ा सम्मान है।

2. देशभक्ति पर भाषण और कविता प्रतियोगिता

बच्चों और युवाओं को स्वतंत्रता दिवस के महत्व पर भाषण देने के लिए प्रेरित करें।

3. शहीदों को श्रद्धांजलि

अमर जवान ज्योति जैसी जगहों पर जाएं, शहीदों की कहानियां बच्चों को सुनाएं।

4. सोशल मीडिया पर देशभक्ति संदेश शेयर करें

फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर देशभक्ति कोट्स, शायरी और वीडियो शेयर करें।

5. पौधारोपण और सफाई अभियान

आजादी का मतलब सिर्फ अंग्रेजों से नहीं, बल्कि प्रदूषण और गंदगी से भी है। इस दिन पौधारोपण करें और समाज को साफ रखने का संकल्प लें।

स्वतंत्रता दिवस पर नारे और संदेश
  • “वतन के लिए जीना और मरना ही सच्ची देशभक्ति है।”
  • “स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।”
  • “देश के लिए किया गया हर प्रयास आज़ादी की रक्षा है।”

15 अगस्त 2025 का संदेश

आज के समय में स्वतंत्रता का अर्थ सिर्फ राजनीतिक आज़ादी नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी विकास भी है। हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम मिलकर भारत को भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और असमानता से मुक्त करेंगे।


निष्कर्ष

स्वतंत्रता दिवस सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि यह हमें अपनी जिम्मेदारियों की याद दिलाने वाला दिन है। आइए, हम सब मिलकर भारत को और बेहतर बनाएं।

15 august happy independence day 2025
15 august happy independence day 2025

चिराग पासवान ने साफ किया रुख: एनडीए में बने रहेंगे, बिहार चुनाव की रणनीति भी बताई

Chirag Paswan

चिराग पासवान ने एनडीए से अलग होने की अटकलों पर विराम लगाया और स्पष्ट किया कि वो एनडीए के मजबूत सहयोगी हैं। साथ ही उन्होंने बिहार चुनाव को लेकर अपनी पूरी रणनीति का खुलासा किया। जानिए पूरी खबर।

Chirag Paswan Bihar Assembly Elections 2025
Chirag Paswan

प्रस्तावना

बिहार की राजनीति में हर दिन नए समीकरण बनते-बिगड़ते रहते हैं। हाल के दिनों में चर्चा थी कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान एनडीए (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन) से अलग हो सकते हैं। लेकिन इन अटकलों पर चिराग पासवान ने खुद बड़ा बयान देकर साफ कर दिया है कि वह एनडीए का हिस्सा हैं और रहेंगे। इतना ही नहीं, उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी रणनीति का भी खुलासा किया है।


एनडीए से अलग होने की अटकलें कैसे उठीं?

बीते कुछ महीनों से एनडीए के भीतर असहमति की खबरें लगातार सुर्खियों में थीं। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि चिराग पासवान पार्टी को स्वतंत्र रास्ते पर ले जाना चाहते हैं। लेकिन चिराग ने इन अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहाhttps://indiacentralnews.com/wp-content/uploads/2025Chirag-Paswan-Bihar

मैंने पहले ही कहा था कि एनडीए हमारा परिवार है और हम इस परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं।”

यह बयान उनके राजनीतिक विरोधियों और अफवाह फैलाने वालों के लिए करारा जवाब माना जा रहा है।

चिराग का बड़ा बयान – ‘हम एनडीए के साथ हैं’

चिराग पासवान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एनडीए से उनका रिश्ता केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक विचारधारा का रिश्ता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता की तारीफ करते हुए कहा,

“हम प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बिहार को विकास की राह पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

बिहार चुनाव की पूरी रणनीति का खुलासा

चिराग पासवान ने यह भी बताया कि उनकी पार्टी बिहार चुनाव में किस रणनीति के साथ उतरेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी का मुख्य फोकस युवा रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास पर होगा।

रणनीति के मुख्य बिंदु:

  1. युवा शक्ति पर फोकस – चिराग का कहना है कि बिहार के युवाओं को रोजगार देना उनकी प्राथमिकता है।
  2. महिला सशक्तिकरण – महिलाओं को रोजगार और शिक्षा में बराबरी दिलाने के लिए खास योजनाएं।
  3. ग्रामीण विकास – गांवों में सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त करना।
  4. शिक्षा सुधार – स्कूलों और कॉलेजों की गुणवत्ता में सुधार और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा।

जमीनी स्तर पर अभियान तेज़

चिराग पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी घर-घर तक पहुंचकर जनता को बताएगी कि उन्होंने बिहार के लिए क्या काम किए हैं और आगे क्या करने वाले हैं। इसके लिए ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ विज़न पर काम होगा।


एनडीए में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की भूमिका

एनडीए के अंदर एलजेपी (रामविलास) की भूमिका अहम मानी जाती है। चिराग पासवान ने इस बारे में कहाHome

“हम एनडीए में मजबूती से खड़े हैं और बिहार में भाजपा और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे।”

यह बयान बताता है कि चिराग किसी भी तरह से गठबंधन से अलग होने के मूड में नहीं हैं।


राजनीतिक संदेश – विपक्ष को बड़ा झटका

चिराग पासवान के इस बयान के बाद विपक्ष को बड़ा झटका लगा है। खासकर उन पार्टियों को जो यह उम्मीद कर रही थीं कि चिराग पासवान एनडीए छोड़कर कोई नया मोर्चा बना सकते हैं।


निष्कर्ष

चिराग पासवान का यह बयान बिहार की राजनीति में बड़ा संदेश देता है। उन्होंने न केवल एनडीए के साथ अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, बल्कि आने वाले बिहार चुनाव के लिए अपनी रणनीति भी साफ कर दी। अब देखना यह है कि उनकी यह रणनीति चुनाव में कितनी कारगर साबित होती है।