“बिहार चुनाव में NDA ने जो बड़े-बड़े वादे किए थे, क्या वे पूरे हुए? इस आर्टिकल में पढ़ें NDA के वादों की सच्चाई और हकीकत।”
बिहार चुनाव के बाद NDA के वादे – हकीकत या सिर्फ बातें
बिहार की राजनीति हमेशा सुर्खियों में रहती है। हर चुनाव में पार्टियां जनता के सामने ढेरों वादे करती हैं, जिन पर जनता भरोसा कर अपना वोट देती है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने कई बड़े-बड़े वादे किए थे। लेकिन आज, 2025 में सवाल यह है कि क्या वो वादे पूरे हुए या सिर्फ चुनावी जुमले साबित हुए? आइए विस्तार से जानते हैं।https://indiacentralnews.com/wp-content/uploads/2025/08/Bihar-election.webp
NDA ने चुनाव के समय क्या वादे किए थे?
2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए ने अपना घोषणा पत्र जारी किया था। इसमें कुछ प्रमुख वादे शामिल थे:
- 19 लाख नौकरियों का वादा
- महिलाओं को रोजगार के अवसर
- स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
- बेहतर शिक्षा व्यवस्था
- सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
- किसानों को आर्थिक सहायता और सिंचाई व्यवस्था में सुधार
इन वादों ने जनता का ध्यान खींचा और अंततः एनडीए को जीत भी दिलाई।
क्या वादे पूरे हुए? हकीकत की पड़ताल
1. रोजगार का वादा – कितना पूरा हुआ?
सबसे बड़ा वादा था 19 लाख नौकरियों का। हालांकि सरकार ने कई भर्ती प्रक्रियाएं शुरू कीं, लेकिन वास्तविक आंकड़ों में बड़ी कमी रही। कुछ सरकारी पदों पर बहाली हुई, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में रोजगार सृजन उम्मीद से कम रहा। बेरोजगारी दर में भी बड़ी गिरावट नहीं आई।
2. महिलाओं के लिए योजनाएं
महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूह और स्टार्टअप योजनाएं शुरू की गईं, लेकिन इनके लाभ सीमित लोगों तक ही पहुंचे। हालांकि शिक्षा में बेटियों की संख्या बढ़ी है।
3. स्वास्थ्य सेवाओं का हाल
कोविड-19 के समय सरकार ने स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश किया, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है। बड़े अस्पतालों की संख्या बढ़ी, पर डॉक्टरों की कमी अब भी एक बड़ी समस्या है।
4. शिक्षा व्यवस्था में बदलाव
स्कूलों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत और शिक्षक नियुक्ति जैसी योजनाएं चलाई गईं, लेकिन जमीनी स्तर पर गुणवत्ता सुधारना अब भी चुनौती है।
5. किसानों के लिए योजनाएं
सरकार ने सिंचाई और फसल बीमा योजनाओं पर जोर दिया, लेकिन बारिश पर निर्भरता कम नहीं हुई। किसान आज भी लागत बढ़ने से परेशान हैं।Home
जनता की राय – भरोसा टूटा या कायम?
लोगों का कहना है कि कुछ वादे पूरे हुए, लेकिन बड़े वादों पर काम अधूरा है। खासकर बेरोजगारी के मुद्दे पर नाराजगी बनी हुई है। वहीं, सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार को लेकर सरकार को सराहा भी जा रहा है।
सोशल मीडिया और विपक्ष का रुखसोशल मीडिया पर विपक्ष लगातार NDA पर वादाखिलाफी का आरोप लगाता रहा है। ट्विटर (अब X) और फेसबुक पर बेरोजगारी, महंगाई जैसे मुद्दे ट्रेंड करते रहते हैं। विपक्ष ने 2025 के चुनाव से पहले इस मुद्दे को और तेज कर दिया है।

अगले चुनाव पर असर पड़ेगा?
2025 के चुनाव से पहले यह मुद्दा बेहद गर्म है। अगर जनता को लगे कि उनके साथ वादाखिलाफी हुई है, तो यह एनडीए के लिए नुकसानदायक हो सकता है।Contact
निष्कर्ष
एनडीए के वादे पूरे भी हुए और अधूरे भी। कुछ कामों की तारीफ होती है, लेकिन बड़े वादे जैसे 19 लाख नौकरियों का वादा आज भी सवालों के घेरे में हैं। अब देखना होगा कि 2025 में जनता इन अधूरे वादों का हिसाब कैसे लेती है।
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